Hot News

‘यथार्थवादी और प्रगतिशील लेखक थे मुंशी प्रेमचंद’

गाजीपुर। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद को ‘उनकी जयंती पर सोमवार को श्रद्धा से याद किया गया। सरजू पांडेय पार्क में जिला कायस्थ समन्वय समिति के तत्वावधान में विचार गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ.मारकंडेय सिंह थे। उन्होंने कहा कि एक महान कथाकार के साथ मुंशी प्रेमचंद महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने अपनी कलम से स्वतंत्रता आंदोलन की धार दी। समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद यथार्थवादी तथा प्रगतिशील लेखक थे। उन्होंने अपने लेखन के जरिये अंधविश्वास, कुरीतियों और सामंतियों के खिलाफ जोरदार हमला किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं रेलवे सलाहकारी बोर्ड के सदस्य सुरेशचंद्र श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद के दिल में गरीबों, पीड़ितों के लिए सहानुभूति का अथाह सागर था। तत्कालीन समाजिक, सरकारी व्यवस्था के खिलाफ उनकी सोच, विरोध आज भी प्रासंगिक हैं। गोष्ठी में समाजसेवी जितेंद्र घोष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अध्यक्ष अंबिका दूबे ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर वरिष्ठ राजनीतिक, समाजसेवी, बुद्धिजीवी मौजूद थे। उनमें रविकांत राय, राजेश कुशवाहा, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, पप्पू श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, शिवशंकर सिन्हा, बालेश्वर नाथ वर्मा, सदानंद यादव, अनंत सिंह, ओमप्रकाश यादव, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, मोहनलाल श्रीवास्तव, दुर्गेश श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, राहुल सिंह, तहसीन अहमद, लड्डन खां, अरुण सहाय, मिश्रीलाल कनौजिया, सुनीलदत्त श्रीवास्तव, विपिन बिहारी वर्मा, जगदीश श्रीवास्तव, राजेंद्र निषाद, विभोर श्रीवास्तव, चतुर्भुज चौबे, उमेशचंद्र श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, अनूप श्रीवास्तव, राजेंद्र अस्थाना, सतेंद्र यादव, रामनगीना यादव, अशोक यादव, रजनीकांत यादव, विजय शंकर यादव, रवींद्र यादव, राकेश यादव, नन्हे खां, अमर सिंह राठौर आदि भी उपस्थित थे। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव तथा संचालन अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया। गोष्ठी के प्रारंभ में मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। उधर वेलफेयर क्लब के तत्वावधान में राधिका देवी पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोराबाज़ार में विचार गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के डॉ. देवप्रकाश राय ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहे कि प्रेमचंद ऐसे कालजयी उपन्या्सकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के दम पर पूरे विश्व में पहचान बनाई। निधन के 81 वर्ष बाद भी उनकी कालजयी रचना ‘कफन’, ‘गबन’, ‘गोदान’, ‘ईदगाह‘ और ‘नमक का दरोगा‘ हर किसी को बचपन की याद दिलाती है। गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार वर्मा, महासचिव सिद्धार्थ मालवीय ने भी मुंशी प्रेमचंद को महान कथाकार के साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन का महान योद्धा बताया। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष धीरेंद्र त्रिपाठी, एड. चंद्रिका प्रसाद, पवन कुमार पांडेय, डॉ. जितेंद्र कुमार, मनोज दूबे, अजय यादव, प्रमोद बिंद, ब्रजेश श्रीवास्तव, राहुल प्रताप मिश्र, राजेंद्र प्रताप तिवारी आदि उपस्थित रहे।dr-virendrar-kumar-mobile-1024x1006

Author: Aajkal