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मनोज सिन्हाः इस बार बदला था अंदाज पर पहले वाला ही नतीजा!

गाजीपुर। मनोज सिन्हा के लिए यह इत्तेफाक है या उनकी खुद की सियासी किस्मत कि दोबारा बनी बड़ी गुंजाइश फिर जहां की तहां रह गई। लगभग तय माना जा रहा था कि रविवार को मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में काट-छांट और विस्तार में उनका प्रमोशन होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसी तरह सूबे के मुख्यमंत्री पद पर जब चयन की बात आई थी तब माना गया था कि वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे लेकिन ऐन वक्त पर योगी आदित्यनाथ का नाम घोषित हो गया था। गौर करें कि इन दोनों घटनाक्रमों में श्री सिन्हा के अंदाज अलग-अलग थे लेकिन उनमें एक बात जरूर दिखी। मतलब परिणाम शून्य। मुख्यमंत्री के चयन के वक्त श्री सिन्हा और उनके लोग एक तरह से मान चुके थे कि बस उन्हें मुख्यमंत्री बनना है। शायद वही वजह थी कि उसी अंदाज में श्री सिन्हा वाराणसी पहुंचे थे। बाबा विश्वनाथ व भैरोनाथ का विधिवत पूजन-अर्चन किए थे। उसके बाद अपने संसदीय क्षेत्र गाजीपुर आए थे। प्रशासन ने उनको मुख्यमंत्री की ही तरह प्रोटोकॉल दिया था। तभी फोन पर सूचना मिली कि मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ का चयन हो गया है। उसके बाद श्री सिन्हा गाजीपुर के शेष कार्यक्रमों को छोड़ कर दिल्ली लौट गए थे। फिर इस बार मोदी मंत्रिपरिषद में उनके प्रमोशन की बात आई तब भी श्री सिन्हा गाजीपुर में थे। हालांकि उनके अंदाज से यह नहीं लगा कि वह अपने प्रमोशन को लेकर उत्सुक अथवा आश्वस्त थे। बल्कि गाजीपुर में उनका दो दिन का कार्यक्रम था। तय कार्यक्रम के तहत शनिवार को वह वाराणसी से गाजीपुर आए। जिला मुख्यालय आने से पहले सैदपुर क्षेत्र के उचौरी गांव में वह पहुंचे थे। जहां उन्होंने भाजपा कार्यकर्ता संजय गुप्त की माता के निधन पर अपनी संवेदना जताए। श्रद्धांजलि अर्पित किए। बताते हैं कि वहीं उन्हें दिल्ली से फोन आया। कहा गया कि मोदी के मंत्रिपरिषद के विस्तार के लिए शपथ समारोह में उनकी मौजूदगी जरूरी है। उसके बाद श्री सिन्हा जिला मुख्यालय आए। जैसे-तैसे समाजसेवी संस्था उम्मीद फाउंडेशन और अति पिछड़ा-अति दलित संघ के कार्यक्रम में भाग लेने के बाद देर शाम दिल्ली वापसी के लिए मुगलसराय रवाना हो गए थे। दिल्ली से फोन आना और दूसरे दिन का कार्यक्रम छोड़ कर श्री सिन्हा का दिल्ली लौटने के घटनाक्रम से साफ लग रहा था कि मोदी मंत्रिपरिषद में जरूर उनका प्रमोशन होगा। खैर प्रमोशन नहीं होने पर गाजीपुर के लोग मायूस हैं। विरोधी दल में सक्रिय एक राजनीतिक समीक्षक ने इस मसले पर चर्चा में चुटकी लेते कहा कि संभव हो कि ऐसे गंभीर मामलों में श्री सिन्हा का गाजीपुर आना अशुभ साबित हो रहा है। वैसे इस बार के भी घटनाक्रम से श्री सिन्हा को नहीं चाहने वाले अपना कलेजा जरूर ठंडा महसूस कर रहे होंगे लेकिन राष्ट्रपति भवन में मंत्रिपरिषद के विस्तार के लिए हुए शपथ समारोह में श्री सिन्हा मौजूद थे। वह कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी के ठीक पीछे बैठे थे। यही नहीं प्रमोशन पाने वाले साथी मंत्रियों तथा नए राज्यमंत्री की शपथ लेने वाले नेताओं को उन्होंने ट्वीट कर बधाई देना भी वह नहीं भूले। इसी बीच शपथ लेने वाले मंत्रियों के मंत्रालय का आवंटन और बदलाव भी हो गया है। उसमें मनोज सिन्हा का मंत्रालय यथावत है। यानी संचार मंत्रालय(स्वतंत्र प्रभार) तथा रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री की हैसियत से काम करते रहेंगे। Sunita-singh-Mobile1-1024x1004

Author: Aajkal