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पुस्तक समीक्षा-बौद्ध युग के गाजीपुर का शोधपरक विश्लेषण

उबैदुर्रहमान सिद्दीकी एक दृष्टिस सम्पचन्न इतिहासविद् है। प्राचीन इतिहास पुरात्त्व एवं संस्कृ्ति में इनकी गहरी रूचि रही है। इनकी नई कृति ‘गाजीपुर में गौतम बुद्ध, सम्रामट अशोक तथा बौद्ध स्थतल’ जनपद के इतिहास-भूगोल को समेटे हुए गौतम बुद्ध के प्रादुर्भाव एवं सम्राट अशोक के शासनकाल के बौद्ध स्थकलों का एक रोचक दस्ताावेज है। सबसे महत्व पूर्ण बात यह है कि पुस्त‍क वातानुकूलित कमरे में बैठकर कल्पुनाओं के आधार पर नहीं लिखी गई है। संदर्भों के लिए लेखन ने दर-दर की खाक छानी है। उन्होंने सैकड़ों संदर्भ-ग्रर्थों, जर्लनों, देश-विदेश के इतिहाकारों के आलेखों एवं अनेक गजेटियरों को पढ़कर तथ्यों को संकलित किया है। इससे पुस्तंक की प्रमाणिता को बल मिलता है। इस लिहाज से इस पुस्तक को शोधग्रंथ भी कहा जा सकता है। पुस्तक में गाजीपुर के पुरातात्विक अवशेष के वर्णन सम्राट अशोक के शासनकाल का इतिहास बोध कराते हैं।
पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर पाली भाषा में एक शिलालेख एवं पुरातात्विशक अवशेषों के चित्र तथा पृष्ठवभाग पर कुछ खंडित प्रस्त्र मूर्तियों का चित्रांकन महत्विपुर्ण हैं, जो गाजीपुर के बहुमूल्यं धरोहर है और आज वह उपेक्षित पड़े हैं। उबैदुर्रहमान की यह कृति अपने अतीत को जानने-समझने के लिए हमारी आंखें खोलती हैं। इसकी रोशनी में हम गाजीपुर में बौद्ध धर्म की व्याीपकता, बौद्धदर्शन एवं सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध के प्रचार-प्रसार के लिए किये गये कार्यों का अध्यमन एव मूल्यां कन कर सकते हैं।
उबैदुर्रहमान साहब ने औड़िहार, मसोनडीह, जहूरगंज, बुद्धीपुर, भीतरी, शादियाबाद, मखदूमपुर, चांडीपुर, गौसपुर, बलिया, लटियां, जमानियां, बारा, हिंगतुर, महाइच आदि स्थरलों पर जाकर पाया कि इन स्थ लों पर प्राप्तर बुद्ध प्रतिमाएं ह्वेनसांग के उस कथन की पुष्टि करती है कि ‘चेन चू’ नगर पश्चििमोत्तुर तथा पुर्वोत्तनर क्षेत्रों में बौद्ध धर्म के उपासक बड़ी संख्याो में निवास करते हैं। इस पुस्तक में गौतम बुद्ध का गाजीपुर आगमन, यहां का सामाजिक परिवेश एवं जनजातियां, सम्राट आशोक का गाजीपुर आगमन, ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत, गाजीपुर के बौद्ध युगीन भग्नावशेष, बौद्ध धर्म की उत्पधत्ति एवं संघर्ष, हीनयान, महायान बौद्ध शाखाओं के प्रचार-प्रसार का तथ्यदपूर्ण सम्यधक विवेचन किया गया है। पुस्तरक की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह गाजीपुर के बौद्ध नवनिर्माण एक अध्यााय है, जो वर्तमान में यहां के बौद्ध धर्मावलंबियों के क्रिया-कलापों, रहन-सहन, पूजा पाठ, शादी-विवाह एवं रीति-रिवाजों पर भी रोशनी डालती है। ऐसा उल्लेाख गाजीपुर के संदर्भो में अब तक लिखी गई किसी अन्ये पुस्तलक में शायद ही कहीं हो। यह लेखक का बहुत ही सराहनीय प्रयास है। यह कृति पठनीय है। इसे पढ़ा जाना चाहिए। मेरी दृष्टिक में उबैदुर्रहमान सिद्दीकी गाजीपुर की एक बौद्धिक निधि हैं। उबैदुर्रहमान ने यह पुस्तक अपने परम श्रद्धेय स्व. हरिद्वार सिंह कुशवाहा, यूसुफपुर, मुहम्मदाबाद गाजीपुर को समर्पित की है।-कमलाशंकर यादव, संपादक गाजीपुर समाचार
पुस्तक-गाजीपुर में गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक तथा बौद्ध स्थल। लेखक-उबैदुर्रहमान सिद्दीकी। मूल्य-300 रुपये। प्रकाशक-अनीसुर्रहमान सिद्दीकी, अब्दुल सदम सोसाइटी, समद मंजिल, मछ्चरहट्टा गाजीपुर। मुद्रक-जय भारत प्रिटिंग प्रेस, डी.51/168सी-2 सूरजकुंड, वाराणसी

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Author: Aajkal